स्वाधीनता एवम विकलांगता

विकलांग मनुष्य के लिए मानवाधिकार क्या हैं?

ये सभी लोगों से संबंधित बुनियादी अधिकार और स्वतंत्रताएं हैं – निष्पक्ष एवं समान रूप से तथा सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ बर्ताव किए जाना। मानवाधिकार ये भी दर्शाते हैं कि सरकार को लोगों के साथ किस प्रकार पेश आना चाहिए। ऐसे अधिकार सुनिश्चित करते हैं कि सभी लोग:

सुरक्षित रह सकें और चोट आदि से उनकी सुरक्षा की जा सके, अपने खुद के निर्णय ले सकें, अच्छा जीवन जी सकें, अपने समुदाय व समाज में शामिल हो सकें।

विकलांगता समझौता क्या है?

पूरे विश्व भर में, विकलांग लोगों को मानवाधिकारों पर वही पहुँच प्राप्त नहीं है जो अन्य लोगों को है। विकलांगता समझौता एक विश्वव्यापी मानवाधिकार समझौता है। यह विकलांग लोगों के मानवाधिकारों को स्पष्ट करता है।

यह समझौता विकलांग लोगों को नए मानवाधिकार नहीं देता है। यह इस बात को स्पष्ट करता है कि उनके अधिकार भी वही हैं जो हर किसी के हैं। यह सरकारों को बताता है कि बाधाओं को किस प्रकार दूर किया जाना चाहिए और किस प्रकार यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विकलांग लोगों को उनके अधिकारों तक पहुँच प्राप्त हो।

संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने दिसम्बर 2006 में विकलांगता समझौते को अपनाया था। इसका उद्देश्य सभी विकलांग लोगों के लिए समान मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देना, इनकी सुरक्षा करना और इन्हें सुनिश्चित करना है, और विकलांग लोगों की प्रतिष्ठा के लिए सम्मान का प्रचार करना है।

न्यूज़ीलैंड सहित कई सरकारों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और समझौते की अभिपुष्टि की है (इसका पालन करने की सहमति दी है)।

विकलांग व्यक्ति कौन हैं?

समझौता उन लोगों को विकलांग लोगों के तौर पर परिभाषित करता है जो “दीर्घावधि, शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या संवेदी विकारों” से ग्रस्त होते हैं। समझौते के अनुसार, विकलांग लोगों के विकारों और समाज के रूख़ के कारण उन्हें दूसरे लोगों के समान समाज में शरीक होने से रोका जा सकता है।

हर कोई अलग होता है। समझौते के सिद्धांत अंतरों का सम्मान करने पर और विकलांग लोगों को विविध मानव समाज के अंश के रूप में स्वीकार करने पर आधारित हैं।

विकलांग लोगों को नज़र-अँदाज़ करने पर समाज उन्हें अशक्त कर देता है। यदि उन्हें सम्मिलित किया जाता है, तो वे संपूर्ण और खुशहाल जीवन जी सकते हैं और समाज में योगदान दे सकते हैं।विकलांगता समझौता क्या वर्णन करता है?

समझौते का लक्ष्य विकलांग लोगों के नागरिक, राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा करना है। समझौते की अभिपुष्टि करने वाली सरकारों को नागरिक एवं राजनैतिक अधिकारों को तुरंत ही लागू करना चाहिए। परंतु आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को वे, अधिक संसाधन हासिल करने के साथ-साथ, लागू कर सकते हैं।

समझौता सरकारों को इस बात पर व्यावहारिक सूचना प्रदान करता है कि विकलांग लोगों के लिए अधिकारों को किस प्रकार सुनिश्चित करना चाहिए। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, और अन्य सेवाओं को सुलभ बनाने के निदेशन शामिल हैं, जैसे कि गतिशीलता साधन, सहायक प्रौद्योगिकी और ‘ईजी रीड (आसानी से पढ़ी जाने वाली)’ सूचना को प्रदान करने के द्वारा।

समझौता विशेष रूप से निम्नलिखित की पहचान करता है:

नागरिक एवं राजनैतिक अधिकार

ज़िंदगी का अधिकार खतरों व आपातिक स्थितियों में सुरक्षा कानून के आगे समान पहचान न्याय तक पहुँच व्यक्ति की स्वतंत्रता व सुरक्षा का अधिकार यातना अथवा क्रूरता से, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या दंड से स्वतंत्रता शोषण, हिंसा एवं दुर्व्यवहार से स्वतंत्रता व्यक्ति की सत्यनिष्ठा की सुरक्षा चलन व राष्ट्रीयता की स्वतंत्रता का अधिकार स्वतंत्र रूप से रहने और समुदाय में शामिल किए जाने का अधिकार व्यक्तिगत गतिशीलता का अधिकार अभिव्यक्ति व राय की स्वतंत्रता, और सूचना तक पहुँच गोपनीयता के लिए सम्मान घर व परिवार के लिए सम्मान राजनैतिक व सार्वजनिक जीवन में सहभागिता।आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकार

शिक्षा

स्वास्थ्य

पुनर्वास एवं वास

कार्य

रहन-सहन और सामाजिक सुरक्षा का पर्याप्त स्तर

सांस्कृतिक जीवन, मनोरंजन, विश्राम एवं खेलकूद में सहभागिता।

अनुपम दे

बिलासपुर

Source:hrc.co.nz(reference)

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